Wednesday, October 28, 2026

A quote from व्यक्तित्व का विघटन - मक्सिम गोर्की द्वारा, 1909

"इस समूचे वातावरण में एक-दूसरे को भक्षण करने की एक अराजक प्रक्रिया निरंतर चालू है। सभी मनुष्य एक-दूसरे के दुश्मन हैं। अपना पेट भरने की इस गंदी लड़ाई में भाग लेने वाला हर आदमी सिर्फ अपना ही सोचता है और अपने चारों ओर संदेह की दृष्टि से देखता है, ताकि पड़ोसी कहीं उसका गला न दबोच ले। थकाने वाली इस पाशविक लड़ाई के भंवर में फँसकर बुद्धि की श्रेष्ठतम शक्तियाँ दूसरों से अपनी रक्षा करने में ही नष्ट हो जाती हैं। मानव अनुभव की यह उपलब्धि—जिसे 'मैं' कहते हैं—एक अंधेरा तहखाना बन जाती है, जिसके अंदर अनुभव को और अधिक समृद्ध न करने और पुराने अनुभव को तहखाने की दम घोंटने वाली कोठरियों में बंद रखने की क्षुद्र प्रवृत्ति हावी रहती है। भरे पेट के अलावा आदमी को और क्या चाहिए? इस लक्ष्य को पाने की खातिर मनुष्य अपने आदर्शों से फिसलकर गिर गया है।"

A quote from -
(व्यक्तित्व का विघटन - मक्सिम गोर्की द्वारा, 1909)
"The Disintegration of Personality" (translated by Julius Katzer) by Maxim Gorky
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